Showing posts with label मज़दूर. Show all posts
Showing posts with label मज़दूर. Show all posts

8.31.2011

मारुति सुज़ुकी, मानेसर के आन्‍दोलनरत मज़दूरों की प्रबुद्ध मीडियाकर्मियों से अपील


आदरणीय मीडियाकर्मियों,

जिस वक्‍त दिल्‍ली में जन लोकपाल के मुद्दे पर आन्‍दोलन की सफलता का जश्‍न मनाया जा रहा था, ठीक उसी वक्‍त राजधानी दिल्‍ली के ऐन बगल में हज़ारों ग़रीब मज़दूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटा जा रहा था। आपको पता ही होगा कि किस तरह से भारत की सबसे बड़ी कार कम्‍पनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजमेण्‍ट ने 29 अगस्‍त की सुबह से मानेसर, गुड़गांव स्थित कारख़ाने में जबरन तालाबन्‍दी कर दी है। मैनेजमेण्‍ट ने अनुशासनहीनता और 'काम धीमा करने' का झूठा आरोप लगाकर 11 स्‍थायी मज़दूरों को बर्खास्‍त कर दिया है और 10 को निलम्बित कर दिया है। कम्‍पनी ने एक निहायत तानाशाहीभरा और सरासर ग़ैरक़ानूनी ''उत्तम आचरण शपथपत्र'' (गुड कंडक्‍ट बॉण्‍ड) भी मज़दूरों पर थोप दिया है और यह फ़रमान जारी कर दिया है कि जो मज़दूर इस पर हस्‍ताक्षर नहीं करेगा उसे ''हड़ताल पर'' माना जाएगा और कारख़ाने में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा।
इस पत्र के अन्‍त में बॉण्‍ड का पाठ दिया गया है, आप स्‍वयं उसे पढ़कर देख सकते हैं कि यह किस कदर अलोकतांत्रिक और निरंकुश है और भारत के संविधान में उल्लिखित मूलभूत अधिकारों का हनन करता है।
आपने यह भी पढ़ा और देखा ही होगा कि मारुति सुजु़की के हम मज़दूर किन परिस्थितियों में काम करते हैं। राज्‍य द्वारा पारित श्रम क़ानूनों के तहत हमें अपनी स्‍वतंत्र यूनियन बनाने का अधिकार है लेकिन कम्‍पनी के कहने पर हमें ग़ैरक़ानूनी तरीके से इस बुनियादी अधिकार से भी वंचित किया जा रहा है ताकि हम अपने साथ होने वाले अन्‍याय के विरुद्ध आवाज़ न उठा सकें।
आप लोगों ने अण्‍णा जी के आन्‍दोलन को अभूतपूर्व कवरेज और समर्थन दिया है। मीडिया के इस प्रचण्‍ड समर्थन और सहयोग के बिना यह आन्‍दोलन न इतना व्‍यापक हो सकता था और न ही इतना सफल। आप लोग जनता के अधिकारों और न्‍याय तथा लोकतंत्र की बात करते हैं। क्‍या इन घनघोर अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों के विरुद्ध मज़दूरों के संघर्ष को आपका समर्थन और सहयोग नहीं मिलेगा? क्‍या मज़दूरों को उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित करना भ्रष्‍टाचार नहीं है? क्‍या सरकार और कम्‍पनी मैनेजमेण्‍ट की यह मिलीभगत जनता के प्रतिनिधियों द्वारा जनता से विश्‍वासघात और भ्रष्‍टाचार का मामला नहीं है? क्‍या इस संघर्ष को मात्र इतनी कवरेज मिलेगी कि दिन में एक-दो बार कुछ सेकंड का समाचार दे दिया जाये जिसमें इस बात की चिन्‍ता अधिक हो कि मज़दूरों के आन्‍दोलन के कारण कम्‍पनी को कितना घाटा हो रहा है? हमें ऐसी कोई रिपोर्ट देखने को नहीं मिली जिसमें जन लोकपाल आन्‍दोलन के कारण देश में उत्‍पादन को हुए घाटे का हिसाब लगाया हो। फिर मज़दूरों के साथ ही यह दोहरा रवैया क्‍यों?
साभार : हिंदू बिज़नस लाइन
यह प्रश्‍न केवल मारुति के एक कारखाने के 3000 मज़दूरों का नहीं है। गुड़गांव के लाखों मज़दूरों और देशभर के करोड़ों मज़दूरों के साथ रोज़ यही सलूक होता है। गुड़गांव और उसके आसपास फैले विशाल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सैकड़ों कारख़ानों में कम से कम 20 लाख मज़दूर काम करते हैं। अकेले आटोमोबाइल उद्योग की इकाइयों में करीब 10 लाख मज़दूर काम करते हैं। अत्‍याधुनिक कारखानों में दुनिया भर की कंपनियों के लिए आटो पार्ट्स बनाने वाले ये मज़दूर बहुत बुरी स्थितियों में काम करते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से भी अधिक ठेका मज़दूर हैं जो 4000-5000 रुपये महीने पर 10-10, 12-12 घंटे काम करते हैं, काम की रफ़्तार और बोझ बेहद अधिक होता है और लगातार सुपरवाइज़रों तथा सिक्‍योरिटी वालों की गाली-गलौज और मारपीट तक सहनी पड़ती है।
हम आपसे और सभी मीडिया कर्मियों से अपील करते हैं कि अन्‍याय और निरंकुशता के विरुद्ध मूलभूत  लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए इस संघर्ष में हमारा साथ दें। आप मीडियाकर्मी के साथ ही एक प्रबुद्ध और ज़ि‍म्‍मेदार नागरिक भी हैं। हम चाहते हैं कि मज़दूरों की न्‍यायसंगत मांगों को स्‍वीकार करने के लिए आप सरकार पर भी दबाव डालें। हम आपको कारखाना गेट पर धरना स्‍थल पर भी आमंत्रित करते हैं।
अग्रिम धन्‍यवाद और सादर अभिवादन सहित,

-- बिगुल मज़दूर दस्‍ता तथा मारुति सुज़ुकी एवं गुड़गांव के विभिन्‍न कारख़ानों में काम करने वाले कुछ मज़दूर
संपर्क: सत्‍यम (9910462009), रूपेश (9213639072),  सौरभ (9811841341)
                                                              http://www.petitiononline.com/MSIL298/petition.html
 --------------------------------------------------------------------------------------------------------

उत्तम आचरण का शपथपत्र
प्रमाणित स्‍थायी आदेश के अनुच्‍छेद 25(3) की शर्तों के अनुसार
मैं,…………………………………. सुपुत्र, श्री  ................स्‍टाफ संख्‍या.................एतदद्वारा स्‍वेच्छा से और बिना किसी दबाव में आए, प्रमाणित स्‍थायी आदेश के अनुच्‍छेद 25(3) के अनुसार इस उत्तम आचरण शपथपत्र को लागू करता हूं और इस पर हस्‍ताक्षर करता हूं। मैं शपथ लेता हूं कि अपनी ड्यूटी ज्‍वाइन करने पर मैं अनुशासनबद्ध होकर सामान्‍य उत्‍पादन कार्य करूंगा और मैं धीमे काम नहीं करूंगा,  बीच-बीच में काम नहीं रोकूंगा, कारख़ाने के भीतर रुककर हड़ताल नहीं करूंगा, नियमानुसार काम (वर्क टु रूल) नहीं करूंगा, तोड़फोड़ या कारखाने के सामान्‍य उत्‍पादन को प्रभावित करने वाली अन्‍य किसी गतिविधि में भाग नहीं लूंगा। मुझे ज्ञात है कि धीमे काम कम करना, बीच-बीच में काम रोकना, कारख़ाने के भीतर रुककर हड़ताल करना (), या सामान्‍य उत्‍पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कोई भी गतिविधि प्रमाणित स्‍थायी आदेश के तहत गंभीर दुराचरण की श्रेणी में आती है और ऐसा कोई भी कार्य करने पर प्रमाणित स्‍थायी आदेश के अनुच्‍छेद 30 के तहत दिए जाने वाले दंड में,  बिना नोटिस के काम से निकाला जाना शामिल है। अत:, मैं एतदद्वारा सहमति देता हूं कि यदि, ड्यूटी ज्‍वाइन करने के बाद, मुझे काम धीमा करने, बीच-बीच में काम रोकने, स्‍टे-इन स्‍ट्राइक करने,  वर्क टु रूल करने, तोड़फोड़ या सामान्‍य उत्‍पादन को बाधित करने वाली किसी भी अन्‍य गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो मुझे प्रमाणित स्‍थायी आदेश के तहत सेवा से  बर्खास्‍त किया जा सकता है।

दिनांक :........................                                                      कर्मचारी के हस्‍ताक्षर

5.03.2011

गोरखपुर में फैक्‍ट्री मज़दूरों पर हमला - 20 मज़दूर गंभीर रूप से घायल

कृपया तुरंत कार्रवाई करें / बड़े पैमाने पर वितरित करें ...

गोरखपुर में फैक्‍ट्री मज़दूरों पर हमला - 20 मज़दूर गंभीर रूप से घायल

गोरखपुर (उ.प्र.) के बरगदवा औद्योगिक क्षेत्र की अंकुर उद्योग लि. नामक फैक्‍ट्री के मालिक द्वारा बुलाए गए गुण्‍डों ने आज (3 मई) सुबह मज़दूरों पर हमला किया। गुण्‍डों द्वारा की गई गोलीबारी से कम से कम 20 मज़दूर गम्‍भीर रूप से घायल हो गये हैं जिन्‍हें जिला अस्‍पताल में भरती कराया गया है। 

मज़दूरों ने फैक्‍ट्री को घेर रखा है ताकि गुण्‍डे निकल कर भाग न सकें। पुलिस बल घटनास्‍थल पर पहुंच गया है और फैक्‍ट्री गेट पर मौजूद है लेकिन उसने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्‍होंने अब तक प्राथमिकी भी नहीं दर्ज की है। अब तक 17 घायल मज़दूरों को ज़िला अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। उनके नाम हैं: 1. विनोद सिंह पुत्र श्री रामसरूप सिंह; 2. विरेन्‍द्र यादव पुत्र श्री मतिलाल यादव; 3. इन्‍द्रदेव पुत्र श्री बिलास दास; 4. अमित कुमार पुत्र श्री भूरे; 5. रमानन्‍द साहनी पुत्र श्री शीतला प्रसाद; 6. शैलेष कुमार पुत्र श्री रामाश्रय और 7. पप्पू जायसवाल, 8.रामजन्‍म भारत पुत्र श्री गुल्‍लू भारती, 9. विनय श्रीवास्‍तव पुत्र श्री तेज नारायण, 10. देवेंद्र यादव पुत्र श्री विजय नाथ, 11. विनोद दुबे पुत्र श्री केदारनाथ, 12. ध्रुव सिंह पुत्र श्री रामरूप सिंह, 13. श्रीनिवास चौहान पुत्र श्री बच्‍चा चौहान 14. संदीप मेहता पुत्र श्री बाबूलाल सिंह 15. राजेश गुप्‍ता पुत्र श्री लक्ष्‍मीकांत गुप्‍ता, 16. कृष्‍णकुमार पुत्र श्री रामकिशोर,17. शिवकुमार पुत्र श्री गिरजा राय.

साफ तौर पर यह उद्योगपतियों की तरफ से एक सुनियोजित हमला है। कुछ दिन पहले से ही मीडिया में एक दुष्‍प्रचार अभियान शुरू किया गया था जिसमें कहा गया था कि अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्षरत मज़दूरों को बाहर से आये ''माओवादियों'' द्वारा भड़काया गया है। याद रहे कि दो साल पहले जब बरगदवा की 7 फैक्ट्रियों के मज़दूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक संगठित आन्‍दोलन शुरू किया था उस समय भी इस प्रकार की अफवाहें फैलाने की कोशिश की गई थी। गोरखपुर के भाजपा सांसद योगी आदित्‍यनाथ फैक्‍ट्री मालिकों का खुले तौर पर समर्थन कर रहे हैं। वे शुरू से ही मज़दूरों के आन्‍दोलन का विरोध करते हुए मज़दूर नेताओं को ''हिंसा भड़काने पर तुले माओवादी'' कहते रहे हैं और पूरे मज़दूर आन्‍दोलन को यह कहकर बदनाम करते रहे हैं कि यह आन्‍दोलन ''चर्च के पैसे से चल रहा'' है।

गोरखपुर का प्रशासन खुलेआम फैक्‍ट्री मालिकों का पक्ष ले रहा है। गोरखपुर के कमिश्‍नर ने 5 दिन पहले ही बयान दिया था कि ''मज़दूरों को भड़काने वाले बाहरी तत्‍वों को बख्‍शा नहीं जायेगा और पुलिस उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी।'' यह बयान गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के फैक्‍ट्री मालिकों की एक बैठक के तत्‍काल बाद आया जिसमें मालिकों ने प्रशासन से ऐसा करने के लिए कहा था। यहां तक कि उन्‍होंने तीन प्रमुख मज़दूर कार्यकर्ताओं तपिश मेंडोला, प्रमोद कुमार और प्रशान्‍त को ''माओवादी'' बताया था और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा था। इन तीन कार्यकर्ताओं को पहले भी 2009 में फर्जी मामला बनाकर गिरफ्तार किया गया था और उन्‍हें तभी छोड़ा गया था जब गोरखपुर के ज़िला मैजिस्‍ट्रेट के कार्यालय पर आयोजित एक जबरदस्‍त जनप्रतिरोध ने प्रशासन को 4 दिन के लिए लगभग पंगु बना दिया।

उल्‍लेखनीय है कि गोरखपुर के उद्योगपति मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत दिल्‍ली में आयोजित मई दिवस की रैली में भाग लेने से मज़दूरों को रोकने के‍ लिए तरह-तरह के हथकण्‍डे इस्‍तेमाल कर रहे थे। झूठे मामलों में लगभग एक दर्जन मज़दूरों की गिरफ्तारी की गई थी और यहां तक कि वी एन डायर्स लिमिटेड नाम की एक फैक्‍ट्री में ताला बंदी कर दी गई थी। लेकिन मज़दूरों ने बड़ी संख्‍या में मई दिवस की रैली में भाग लेकर मालिकों को करारा जवाब दिया। गोरखपुर से लगभग 2000 मज़दूरों ने मज़दूर मांगपत्रक आन्‍दोलन के तहत मई दिवस की रैली में भाग लिया जिसमें देश के अलग-अलग हिस्‍सों से आये हज़ारों मज़दूरों ने भाग लिया था। इससे फैक्‍ट्री मालिकों और उनके राजनीतिक संरक्षक और भी बौखलाये हुए हैं और वे मज़दूरों को ''सबक़ सिखाने'' की कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया के हमारे कुछ शुभचिन्‍तकों ने हमें सचेत किया है कि गोरखपुर का ज़िला प्रशासन मज़दूर नेताओं और अगुवा मज़दूरों को हिंसा की इस घटना में फर्जी ढंग से फंसाने और उन पर गम्‍भीर आरोप लगाकर उन्‍हें परिदृश्‍य से हटा देने की योजना बना रहा है ताकि आन्‍दोलन को कुचला जा सके।

हम आप सबसे अपील करते हैं कि फैक्‍ट्री मालिक और उसके गुण्‍डों को गिरफ्तार करने के लिए राज्‍य और ज़िला प्रशासन पर दबाव डालें और मज़दूर नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाने से उन्‍हें रोकें। संबंधित अधिकारियों के फोन/फैक्‍स नंबरों और ईमेल आईडी की एक सूची इस मेल के साथ संलग्‍न है।

सत्‍यम
फोन : 9910462009



Commissioner                                     0551 - 2338817 (Fax)
Office of the Commissioner
Collectrate
Gorakhpur - 273001


Gorakhpur (0551)
Divisional Commissioner
2333076, 2335238 (off)
2336022 (Res)
Fax: 2338817

District Magistrate                               0551 - 2334569 (Fax)
Office of the District Magistrate
Collectrate
Gorakhpur - 273001


City Magistrate: Arun - 9450924888



Dy Inspector General of Police          0551 - 2201187 / 2333442
Cantt.
Gorakhpur:

Dy. Labour Commissioner,
Labour Office
Civil Lines
Gorakhpur-273001

DLC, ML Choudhuri - 9838123667



Governor, BL Joshi
Raj Bhavan, Lucknow, 226001
0522-2220331, 2236992, 2220494
Fax: 0522-2223892
Special Secretary to Governor: 0522-2236113







Km. Mayawati,
Chief Minister
Fifth Floor, Secretariat Annexe
Lucknow-226001
0522 - 2235733, 2239234 (Fax)
2236181  2239296
2215501 (Phone: (Pffice)
2236838 2236985
Phone: (Res)


Shri Badshah Singh :                          0522 - 2238925 (Fax)
Labour Minister, 
Department of Labour
Secretariat
Lucknow

Principal Secretary, Labour                0522 - 2237831 (Fax)
Department of Labour
Secretariat
Lucknow - 226001






District & STD Code
Post
Office
Residence
Fax
Gorakhpur (0551)
Divisional Commissioner
2333076, 2335238
2336022
2338817
Gorakhpur (0551) )
D.M.
2336005
2344544, 2336007
2334569
Gorakhpur (0551)
D.I.G.
2333442
2201100
--


Email IDs

covdnhrc@nic.in
National Human rights commission 

cmup@nic.in <cmup@nic.in>           CM, UP

hgovup@up.nic.in <hgovup@up.nic.in>  Governer, UP

digrgkr@up.nic.in                     DIG, Gorakhpur

commgor@up.nic.in                 Commissioner, Gorakhpur   
laborweb@nic.in                      Labour Ministry, Central

cprabhat@ias.nic.in              Sh. P.C. Chaturvedi, Secretary, Labour, Central


uphrclko@yahoo.co.in        
UP human rights commission

sgnhrc@nic.in                  Secretary General
                

secup.labor@up.nic.in           Secretary, Labour, UP

ssecup.labour@up.nic.in      Special Secretary, Labour, UP

10.17.2009

गरीबों-दलितों की ''मसीहा'' मायावती का आतंकराज, मज़दूर कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे

नक्‍सलवाद के नाम पर पहले भी जनांदलनों को कुचलने और उनके नेताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाने की खबरें आती रही हैं, लेकिन अक्‍सर ऐसी खबरें छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्‍ट्र  आदि से मिलती थीं। अब उत्तर प्रदेश का शासन-प्रशासन भी इसी हथकण्‍डे को अपनाने लगा है। परसों देर रात गोरखपुर में तीन मज़दूर कार्यकर्ताओं को फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्र बता रहे हैं कि जिस फैक्‍ट्री के मजदूर पिछले लगभग ढाई महीने से आन्‍दोलन कर रहे थे, उसके मालिक की शह पर प्रशासन उस आन्‍दोलन की अगुवाई करने वालों को नक्‍सलवादी घोषित करके उन पर राजद्रोह का मामला दायर करने की तैयारी कर रहा है। इस मामलें में बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों-पत्रकारों ने एक अपील जारी की है। आप इस अपील को पढ़ें और  जल्‍द से जल्‍द संबंधित नेताओं-अधिकारियों से अपना विरोध दर्ज़ कराएं। फोन और फैक्‍स नंबर इस अपील के अंत में दिए गए हैं।
...................................................................


मज़दूर संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों के नाम अपील


मज़दूर आन्दोलन को कुचलने के लिए तीन नेतृत्वकारी युवा कार्यकर्ता झूठे 
आरोपों में गिरफ्तार, 9 मजदूरों पर फर्जी मुकदमे कायम



  • मामूली धाराओं में भी  22 अक्टूबर तक ज़मानत देने से इंकार, हिरासत में पिटाई
  • ''नक्सली'' ''आतंकवादी'' होने का आरोप लगाकर लंबे समय तक बंद रखने की तैयारी
  • मालिकों की शह पर पुलिसिया आतंकराज


पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में करीब ढाई महीने से चल रहे मज़दूर आन्दोलन को कुचलने के लिए प्रशासन ने फैक्ट्री मालिकों के इशारे पर एकदम नंगा आतंकराज कायम कर दिया है। गिरफ्तारियां, फर्जी मुकदमे, मीडिया के जरिए दुष्प्रचार व धमकियों के जरिए मालिक-प्रशासन-नेताशाही का गंठजोड़ किसी भी कीमत पर इस न्यायपूर्ण आंदोलन को कुचलने पर आमादा है। 15 अक्टूबर की रात संयुक्त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा के तीन नेतृत्वकारी कार्यकर्ताओं - प्रशांत, प्रमोद कुमार और तपीश मैंदोला को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस उन पर शांति भंग जैसी मामूली धाराएं ही लगा पाई लेकिन फिर भी 16 अक्टूबर को सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें ज़मानत देने से इंकार करके 22 अक्टूबर तक जेल भेज दिया। इससे पहले 15 अक्टूबर की रात ज़िला प्रशासन ने तीनों नेताओं को बातचीत के लिए एडीएम सिटी के कार्यालय में बुलाया जहां काफी देर तक उन्हें जबरन बैठाये रखा गया और उनके मोबाइल फोन बंद कर दिये गये। उन्हें आन्दोलन से अलग हो जाने के लिए धमकियां दी गईं। इसके बाद उन्हें कैंट थाने ले जाया गया जहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके अगले दिन मालिकों की ओर से इन तीन नेताओं के अलावा 9 मजदूरों पर जबरन मिल बंद कराने, धमकियां देने जैसे आरोपों में एकदम झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया गया। गिरफ्तारी वाले दिन से ही जिला प्र्रशासन के अफसर ऐसे बयान दे रहे हैं कि इन मजदूर नेताओं को ”माओवादी“ होने की आशंका में गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से ”आपत्तिजनक“ साहित्य आदि बरामद किया गया है। उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के सांसद की अगुवाई में स्थानीय उद्योगपतियों और प्रशासन की ओर से शुरू से ही आन्दोलन को बदनाम करने के लिए इन नेताओं पर ‘‘नक्सली’’ और ‘‘बाहरी’’ होने का आरोप लगाया जा रहा है। कुछ अफसरों ने स्थानीय पत्रकारों को बताया है कि पुलिस इन नेताओं को लंबे समय तक अंदर रखने के लिए मामला तैयार कर रही है।
इससे पहले 15 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में अनशन और धरने पर बैठे मजदूरों पर हमला बोलकर उन्हें वहां से हटा दिया गया। महिला मजदूरों को घसीट-घसीटकर वहां से हटाया गया। प्रशांत, प्रमोद एवं तपीश को ले जाने का विरोध कर रही महिलाओं के साथ मारपीट की गई। ये मजदूर स्वयं प्रशासन द्वारा पिछले 24 सितम्बर को कराये गये समझौते को लागू कराने की मांग पिछले कई दिनों से प्रशासन से कर रहे थे। 3 अगस्त से जारी आन्दोलन के पक्ष में जबर्दस्त जनदबाव के चलते प्रशासन ने समझौता कराया था लेकिन मिलमालिकों ने उसे लागू ही नहीं किया। समझौते के बाद दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आधे से अधिक मजदूरों को काम पर नहीं लिया गया है। थक हारकर 14 अक्टूबर से जब वे डीएम कार्यालय पर अनशन पर बैठे तो प्रशासन पूरी ताकत से उन पर टूट पड़ा। मॉडर्न लेमिनेटर्स लि. और मॉडर्न पैकेजिंग लि. के इन मजदूरों की मांगें बेहद मामूली हैं। वे न्यूनतम मजदूरी, जॉब कार्ड, ईएसआई कार्ड देने जैसे बेहद बुनियादी हक मांग रहे हैं, श्रम कानूनों के महज़ कुछ हिस्सों को लागू करने की मांग कर रहे हैं। बिना किसी सुविधा के 12-12 घंटे, बेहद कम मजदूरी पर, अत्यंत असुरक्षित और असहनीय परिस्थितियों में ये मजदूर आधुनिक गुलामों की तरह से काम करते रहे हैं। गोरखपुर के सभी कारखानों में ऐसे ही हालात हैं। किसी कारखाने में यूनियन नहीं है, संगठित होने की किसी भी कोशिश को फौरन कुचल दिया जाता है। पहली बार करीब पांच महीने पहले तीन कारखानों के मजूदरों ने संयुक्त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा बनाकर न्यूनतम मजदूरी देने और काम के घंटे कम करने की लड़ाई लड़ी और आंशिक कामयाबी पायी। इससे बरसों से नारकीय हालात में खट रहे हजारों अन्य मजदूरों को भी हौसला मिला। इसीलिए यह मजदूर आन्दोलन इन दो कारखानों के ही नहीं बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमाम उद्योगपतियों को बुरी तरह खटक रहा है और वे हर कीमत पर इसे कुचलकर मजदूरों को ”सबक सिखा देना“ चाहते हैं। कारखाना मालिक पवन बथवाल दबंग कांगे्रसी नेता है और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ का उसे खुला समर्थन प्राप्त है। प्रशासन और श्रम विभाग के अफसर बिके हुए हैं। शहर में आम चर्चा है कि मालिकों ने अफसरों को खरीदने के लिए दोनों हाथों से पैसा लुटाया है। मजदूरों ने पिछले दो महीनों के दौरान गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक, हर स्तर पर बार-बार अपनी बात पहुंचायी है लेकिन ”सर्वजन हिताय“ की बात करने वाली सरकार कान में तेल डालकर सो रही है। मजदूरों और नेतृत्व के लोगों को डराने-धमकाने, फोड़ने की हर कोशिश नाकाम हो जाने के बाद पिछले महीने से यह सुनियोजित मुहिम छेड़ दी गई कि इस आन्दोलन को ‘‘माओवादी आंतकवादी’’ और ‘‘बाहरी तत्व’’ चला रहे हैं और यह ”पूर्वी उत्तर प्रदेश को अस्थिर करने की साज़िश“ है। इससे बड़ा झूठ कोई नहीं हो सकता।
संघर्ष मोर्चा में सक्रिय ये तीनों ही कार्यकर्ता जनसंगठनों से लंबे समय से जुड़कर काम करते रहे हैं। प्रशांत और प्रमोद विगत कई वर्षों से गोरखपुर के छात्रों और नौजवानों के बीच सामाजिक काम करते रहे हैं। पिछले वर्ष ‘गीडा’ के एक कारखाने के मज़दूरों तथा नगर महापालिका और विश्वविद्यालय के सफाई कर्मचारियों के आन्दोलनों में भी उनकी सक्रियता थी। शहर के अधिकांश प्रबुद्ध नागरिक और मज़दूर उन्हें जानते हैं। तपीश मैंदोला मज़दूर अखबार ‘बिगुल’ से जुड़े हैं और श्रम मामलों के विशेषज्ञ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। कई वर्षों से वे नोएडा, गाज़ियाबाद के सफाई मज़दूरों और फैक्ट्री मज़दूरों के बीच काम करते रहे हैं। इन दिनों उनके नेतृत्व में मऊ, मैनपुरी और इलाहाबाद में नरेगा के मज़दूर अपनी माँगों को लेकर संगठित हो रहे हैं। तपीश के नेतृत्व में दिल्ली और आसपास से मज़दूरों के खोये हुए बच्चों के बारे में प्रस्तुत बहुचर्चित रिपोर्ट पर इन दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। ये तीनों साथी जन-आधारित राजनीति के पक्षधर हैं और आतंकवाद की राजनीति के विरोधी हैं। किसी भी जनान्दोलन को ‘‘माओवाद’’ का ठप्पा लगाकर कुचलने के नये सरकारी हथकंडे का यह एक नंगा उदाहरण है। इसका पुरज़ोर विरोध किया जाना बेहद ज़रूरी है। यह तमाम इंसाफ़पसंद नागरिकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, छात्र-युवा कार्यकर्ताओं को सत्ता की सीधी चुनौती है! हमारी आपसे अपील है कि हर संभव तरीके से अपना विरोध दर्ज कराए। 
आप क्या कर सकते हैं - मज़दूर आन्दोलन के दमन और मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, श्रम और श्रम मंत्री को, तथा गोरखुपर के जिलाधिकारी को फैक्स, ईमेल या स्पीडपोस्ट से विरोधपत्र भेजें। ईमेल की एक प्रति कृपया हमें भी फारवर्ड कर दें। - इस मुद्दे पर बैठकें तथा धरना-विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। - अपने संगठनों की ओर से अपनी ओर से इसके विरोध में बयान जारी करें और हस्ताक्षर अभियान चलाकर उपरोक्त पतों पर भेजें। - दिल्ली में 21 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश भवन पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।

गोरखपुर के मजदूर आन्दोलन के समर्थक बुद्धिजीवियों, आम नागरिकों, छात्रों-युवाओं की ओर से,
कात्यायनी, सत्यम, मीनाक्षी, रामबाबू, कमला पाण्डेय, संदीप, संजीव माथुर, जयपुष्प, कपिल स्वामी, अभिनव, सुखविन्दर, डा. दूधनाथ, शिवार्थ पाण्डेय, अजय स्वामी, शिवानी कौल, लता, श्वेता, नेहा, लखविन्दर, राजविन्दर, आशीष, योगेश स्वामी, नमिता, विमला सक्करवाल, चारुचन्द्र पाठक, रूपेश राय, जनार्दन, समीक्षा, राजेन्द्र पासवान...




पतों एवं फ़ोन-फ़ैक्‍स नंबरों की सूची:




Commissioner 0551 - 2338817 (Fax)
Office of the Commissioner
Collectrate
Gorakhpur - 273001

Commissioner: PK Mahanty - 9936581000


District Magistrate 0551 - 2334569 (Fax)
Office of the District Magistrate
Collectrate
Gorakhpur - 273001

DM: AK Shukla - 9454417544

City Magistrate: Akhilesh Tiwari - 9454416211


Dy Inspector General of Police 0551 - 2201187 / 2333442
Cantt.
Gorakhpur:

Dy. Labour Commissioner,
Labour Office
Civil Lines
Gorakhpur-273001

DLC, ML Choudhuri - 9838123667


Governor, BL Joshi
Raj Bhavan, Lucknow, 226001
0522-2220331, 2236992, 2220494
Fax: 0522-2223892
Special Secretary to Governor: 0522-2236113

Km. Mayawati,
Chief Minister
Fifth Floor, Secretariat Annexe
Lucknow-226001
0522 - 2235733, 2239234 (Fax)

2236181  2239296
2215501 (Phone: (Office) 2236838 2236985
Phone: (Res)


Shri Badshah Singh : 0522 - 2238925 (Fax)
Labour Minister,
Department of Labour
Secretariat
Lucknow

Principal Secretary, Labour 0522 - 2237831 (Fax)
Department of Labour
Secretariat
Lucknow - 226001