11.27.2007

एक कहानी


प्रेम... यह शब्‍द सुनते ही मन के समंदर में कई विचार और अनुभव डूबते-उतराने लगते हैं...कितनी ही उम्र क्‍यों न हो...प्रेम कहानियां सबको रोमांचित करती हैं...और करती रहेंगी...चाहे कोई भी युग हो कोई भी देश....लैला-मजनूं, हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट जैसी तमाम कहानियां सदियों से चली आ रही हैं...लेकिन आज मैंने एक कहानी सुनी...एक प्रेम कहानी, और मानवीय त्रासदी की दास्‍तान....जिसमें न तो खलनायक है, न बैरी जमाना। बस संवेदनाएं हैं, और तकलीफ। और हां! जो इसमें छिपा है शायद उसी को कहा जाता हो - सच्‍चा प्रेम!





***

दुनिया के किसी कोने में एक लड़की रहती थी...हर लड़की की तरह उसके भी कुछ अरमान थे...वह भी सपने देखा करती थी, लेकिन मन की आंखों से। हां, मन की आंखों से... क्‍योंकि वह देख नहीं सकती थी। शायद यही वजह थी कि वह सबसे नफरत करने लगी थी, सिवाय अपने प्रेमी के।
वह उससे अक्‍सर कहा करती, ''यदि मैं तुम्‍हें देख पाती तो मैं निश्चित ही तुमसे शादी कर लेती।''...
एक दिन अचानक यूं हुआ कि किसी ने उस लड़की के जीवन में रंग भर दिए, उसे अपनी आंखें दान करके....। अब वह देख सकती थी...उसे सब कुछ खूबसूरत लगने लगा था...। लेकिन जब उसने अपने प्रेमी को देखा तो ऊंची उड़ान भरता उसकी कल्‍पनाओं का परिंदा धम्‍म से नीचे आ गिरा...।
उसका प्रेमी भी अंधा था...।
जब उसके प्रेमी ने उससे पूछा, ''क्‍या अब तुम मुझसे शादी करोगी?''
लड़की ने, जो अब देख सकती थी, बेहद रूखे ढंग से जवाब दिया, ''नहीं...! ''
यह सुनकर उसका प्रेमी अपने चेहरे पर मुस्‍कुराहट लिए वहां से चल दिया...और जाते-जाते केवल इतना कहा,
''मेरी आंखों का ख्‍याल रखना प्रिय...!''


(यह कहानी मैंने ऑर्कुट पर रेयाज़-उल-हक़ जी के स्‍क्रैपबुक में पढ़ी थी, किन्‍हीं ताया ने वहां लिखी थी। पता नहीं इसके वास्‍तविक लेखक कौन हैं। बस दिल को छू गई और हिंदी में अनुवाद करके आप तक पहुंचा रहा हूं।)

10 comments:

manjula said...

दिल को छू गयी यह कहानी. सच यही है जिन्‍दगी

बाल किशन said...

सच दिल को छु लेने वाली एक कहानी. कंही-कंही मन को उदास भी कर देती है.

Reyaz-ul-haque said...

anuvad achchha hai aur sabse badi baat hai ki is kahani ko jis tippani ke sath pesh kiya gaya hai wah lajawab hai.

lage rahiye dost.

संदीप said...

धन्यवाद रेयाज़,


आपकी टिप्पणी देखकर अच्छा लगा। लेकिन यह अभी तक पता नहीं लग पाया है कि यह कहानी किसकी है, पता चले तो बताइगए जरूर।

मीनाक्षी said...

मर्मस्पर्शी !!
इस संसार में प्रेम ही सत्य है और सत्य शिव की तरह गले में ज़हर रखते हुए भी सुन्दर दिखता है.

Pratik said...

harsh are the ways of this world!!!

vimal verma said...

छोटी कहानी का फ़लक कितना बड़ा हो सकता है इस कहानी को पढ़ कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है,ओ हेनरी की कहानियां भी कुछ इस तरह का समा बंध देती हैं, बधाई

मृत्युंजय कुमार said...

भइया, इस कहानी को जो पढ़ेगा, उसी के दिल को छू जाएगी

ओमप्रकाश तिवारी said...

एक आज के प़यार करने वाले हैं। लडकी यदि इनकार कर देती है तॊ तेजाब डाल देते हैं।

anubhuti said...

is kahani ko maine pehle bhi pda hai par mai bhi apki tarah isi talash me hu ki iske lekhak kaun ho kher jo bhi ho is kahani me unhone pyar ke dono paksho ko rakha hai vfa bhi aur bevfai bhi