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7.19.2009

भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध के नये रूप

(हमारे प्रिय साथी अरविंद सिंह के निधन के एक वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर प्रथम अरविन्‍द स्‍मृति संगोष्‍ठी का आयोजन किया जा रहा है। अरविंद के जीवन के मकसद से जुड़े विषय भूमण्‍डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध के नये रूप पर यह संगोष्‍ठी हो रही है। सभी इच्‍छुक लोग सादर आमंत्रित हैं। विस्‍तृत आमंत्रण नीचे दे रहा हूं।)
प्रथम अरविन्द स्मृति संगोष्‍ठी
(24 जुलाई, 2009)
विषय: भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध के नये रूप

यह संगोष्ठी हम अपने प्रिय दिवंगत साथी अरविन्द सिंह की स्मृति में आयोजित कर रहे हैं। 24 जुलाई, 2009 साथी अरविन्द की पहली पुण्यतिथि है। गत वर्ष इसी दिन, उनका असामयिक निध्न हो गया था। तब उनकी आयु मात्र 44 वर्ष थी। वाम प्रगतिशील धारा के अधिकांश बुद्धिजीवी, क्रान्तिकारी वामधारा के राजनीतिक कार्यकर्ता और मज़दूर संगठनकर्ता साथी अरविन्द से परिचित हैं। वे मज़दूर अख़बार `बिगुल´ और वाम बौद्धिक पत्रिका `दायित्वबोध´ से जुड़े थे। छात्र-युवा आन्दोलन में लगभग डेढ़ दशक की सक्रियता के बाद वे मज़दूरों को संगठित करने के काम में लगभग एक दशक से लगे हुए थे। दिल्ली और नोएडा से लेकर पूर्वी उत्तरप्रदेश तक कई मज़दूर संघर्षों में वे अग्रणी भूमिका निभा चुके थे। अपने अन्तिम समय में भी वे गोरखपुर में सफाईकर्मियों के आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे। उनका छोटा किन्तु सघन जीवन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। `भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध के नये रूप´ जैसे ज्वलन्त और जीवन्त विषय पर संगोष्ठी का आयोजन ऐसे साथी को याद करने का शायद सबसे सही-सटीक तरीका होगा। हम सभी मज़दूर कार्यकर्ताओं, मज़दूर आन्दोलन से जुड़ाव एवं हमदर्दी रखने वाले बुद्धिजीवियों और नागरिकों को इस संगोष्ठी में भाग लेने के लिए गर्मजोशी एवं हार्दिक आग्रह के साथ आमंत्रित करते हैं। हमें विश्वास है कि आन्दोलन की मौजूदा चुनौतियों पर हम जीवन्त और उपयोगी चर्चा करेंगे।

स्‍थान: गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान सभागार, नई दिल्ली
सुबह 11 बजे से शाम 7.30 बजे तक
आयोजक: राहुल फ़ाउण्‍डेशन